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Speedy Shorthand
Shorthand Dictation Test
🇮🇳 Hindi
प्रतिलेखन- 67 & 68 (रामधारी गुप्ता खंड-1)
🎙️
Original Speed
80 WPM
📝
Words
759
⏱️
Typing Time
60 min
🎯
Pass
0 WPM / 25 Marks
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/
–:––
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〰️ Fluctuation
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📄 Transcript
महोदय, आज हमारे तरीकों से और कार्य-संचालन द्वारा परिवर्तन की दिशा में समाज के बढ़ने के उक्त क्रम पर संगठित रूप से प्रहार किए जा रहे हैं। कभी-कभी मुझे लगता है कि सही उद्देश्यों का भी इस्तेमाल गलत तरह से किया जाता है जिससे बृहत्तर उद्देश्यों पर प्रहार किया जाए और इस पर आपको अपने विचार-विमर्श के दौरान ध्यान देना चाहिए। काम की बेहतर व्यवस्था का बड़ा महत्व है। इसके लिए अधिक उपयुक्त वेतन आवश्यक होता है। साथ ही काम का स्थान, कमरे आदि भी साफ-सुथरे होने चाहिए। लेकिन जो लोग साथ-साथ काम करते हैं श्रमिक, प्रबंधक तथा किसी परियोजना में या कारखाने में काम करने वाले अन्य लोग उनमें अच्छे संबंध होना आवश्यक है, तथा यह शायद अन्य सभी बातों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। मुझे आशा है कि यह बैठक, ऐसी विचार गोष्ठियों और सम्मेलन, इस प्रकार से काम के लिए बेहतर वातावरण को संभव बनाएगी। सरकार को काफी कुछ करना है और वह करेगी भी। हालाँकि आज हमारे यहाँ की स्थिति में ऐसा करना हमेशा ही सरल नहीं होता। यह कहना सरल है कि हम ऐसा करेंगे। नीति-संबंधी निर्णय भी सरलता से लिया जा सकता है। लेकिन किसी निर्णय को समुचित ढंग से लागू कर पाना बहुत कठिन होता है। मैं यह बहाने की खोज के लिए नहीं कह रही हूँ, क्योंकि कठिनाइयाँ तो उन पर विजय पानी ही होती है और हम ऐसा करने के लिए कृतसंकल्प हैं। लेकिन आपको पता होना चाहिए कि अमुक कठिनाइयाँ हैं और उन पर विजय पाने के लिए केवल इच्छा करने या वक्तव्य देने से काम नहीं चलता। इसके लिए स्थिति को समझना और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ना होता है, चाहे रुकावटें कितनी ही बड़ी क्यों न हों, कठिनाइयाँ कैसी भी क्यों न हों। सरकार, का यही संकल्प है। सार्वजनिक क्षेत्र को बहुत महत्वपूर्ण योगदान करना है। उसे यह काम अपनी उपलब्धियों द्वारा ही नहीं, बल्कि श्रमिकों की भागीदारी की भावना को अनुभव करते हुए करना है। मैं जानती हूँ कि आज यह भावना सभी श्रमिकों में नहीं है। मुझे यह भी पता है कि इसके लिए हमेशा उन्हें ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हमने प्रयास ही नहीं किया है कि उन्हें ऐसा अनुभव होता रहे। मैं जानती हूँ कि प्रायः जो मजदूर किसी बाँध के निर्माण में लगे हैं, उन्हें पता ही नहीं होता कि बाँध होता क्या है।
महोदय, हमने ऐसा प्रयास ही नहीं किया कि किसी परियोजना को एक ऐसा संयुक्त उद्यम माना जाए जिसमें उसके निर्माता, श्रमिकों, वहाँ रहने वाले अन्य मजदूरों, वैज्ञानिकों, प्रबंधकों तथा अन्य संबद्ध लोगों को भागीदारी का अनुभव हो। हमने समस्याओं को पुराने कोण से ही देखा है और लोगों को अलग-अलग खानों में बाँट दिया है। इसलिए ये झूठे विभाजन समाप्त होने चाहिए। हमारे समाज में ऐसे अनेक विभाजन हैं। शायद वे सभी समाजों में होते हैं। लेकिन हमारे यहाँ वे सामान्य से कुछ ज्यादा ही हैं। ये धर्म के आधार पर, जातियों के आधार पर, भाषा और क्षेत्र के आधार पर पाए जाते हैं। एक व्यक्ति और एक वर्ग को दूसरों से अलग करने वाली अनेक तरह की दीवारें हैं और इन सब विभाजनों से हमारा राष्ट्र कमजोर हुआ है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इन विभाजनों का इस्तेमाल हमारी एकता को तोड़ने के लिए किया जाता था। आज भी उन्हें उन लोगों को कमजोर बनाने के लिए काम में लाया जाता है जो एक होकर खड़े होना चाहते हैं, जो भिन्न-भिन्न जातियों और धर्मों के होते हुए भी एक ही उद्देश्य से प्रेरित हैं। हमें यह सावधानी रखनी होगी कि ऐसे लोगों के समूह को कोई भी कमजोर न कर सके। हमें ऐसे वर्गों का और विस्तार करने की कोशिश करनी चाहिए जिससे उनके अंतर्गत हमारे और भी अधिक ऐसे लोग आते जाएँ जो एक विशेष उद्देश्य को पूरा करने के लिए कृतसंकल्प हों, क्योंकि यही देश के हित में है, इसी से देश मजबूत बनेगा, देशवासी मजबूत बनेंगे जिनके अंतर्गत कौई एक वर्ग ही नहीं है, बल्कि सभी वर्गों के लोग हैं। इसलिए संपूर्ण शिक्षा का, अभिप्राय है कि हम केवल अपने अधिकारों के लिए संघर्ष न करें, बल्कि यह भी देखें कि हमारे प्रयासों का अल्पसंख्यक समूहों पर क्या असर पड़ेगा। औद्योगिक क्षेत्र सुगठित है, उनकी आवाज शक्तिशाली है, उसमें एकता है और इसलिए इसका प्रभाव पड़ता है। लेकिन हमारे देश में बहुत-से ऐसे वर्ग हैं जिनकी आवश्यकताएँ अन्य वर्गों से कहीं ज्यादा महत्व की हैं। परंतु उनमें एकता नहीं है, उनकी माँग को प्रस्तुत करने वाला कोई नहीं है और उन्हें शायद पता तक नहीं होता कि उनकी कुछ माँगें भी हैं। लेकिन केवल इसी कारण से उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। हम यह नहीं कह सकते कि उनकी कोई माँगें नहीं हैं।
महोदय, हमने ऐसा प्रयास ही नहीं किया कि किसी परियोजना को एक ऐसा संयुक्त उद्यम माना जाए जिसमें उसके निर्माता, श्रमिकों, वहाँ रहने वाले अन्य मजदूरों, वैज्ञानिकों, प्रबंधकों तथा अन्य संबद्ध लोगों को भागीदारी का अनुभव हो। हमने समस्याओं को पुराने कोण से ही देखा है और लोगों को अलग-अलग खानों में बाँट दिया है। इसलिए ये झूठे विभाजन समाप्त होने चाहिए। हमारे समाज में ऐसे अनेक विभाजन हैं। शायद वे सभी समाजों में होते हैं। लेकिन हमारे यहाँ वे सामान्य से कुछ ज्यादा ही हैं। ये धर्म के आधार पर, जातियों के आधार पर, भाषा और क्षेत्र के आधार पर पाए जाते हैं। एक व्यक्ति और एक वर्ग को दूसरों से अलग करने वाली अनेक तरह की दीवारें हैं और इन सब विभाजनों से हमारा राष्ट्र कमजोर हुआ है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इन विभाजनों का इस्तेमाल हमारी एकता को तोड़ने के लिए किया जाता था। आज भी उन्हें उन लोगों को कमजोर बनाने के लिए काम में लाया जाता है जो एक होकर खड़े होना चाहते हैं, जो भिन्न-भिन्न जातियों और धर्मों के होते हुए भी एक ही उद्देश्य से प्रेरित हैं। हमें यह सावधानी रखनी होगी कि ऐसे लोगों के समूह को कोई भी कमजोर न कर सके। हमें ऐसे वर्गों का और विस्तार करने की कोशिश करनी चाहिए जिससे उनके अंतर्गत हमारे और भी अधिक ऐसे लोग आते जाएँ जो एक विशेष उद्देश्य को पूरा करने के लिए कृतसंकल्प हों, क्योंकि यही देश के हित में है, इसी से देश मजबूत बनेगा, देशवासी मजबूत बनेंगे जिनके अंतर्गत कौई एक वर्ग ही नहीं है, बल्कि सभी वर्गों के लोग हैं। इसलिए संपूर्ण शिक्षा का, अभिप्राय है कि हम केवल अपने अधिकारों के लिए संघर्ष न करें, बल्कि यह भी देखें कि हमारे प्रयासों का अल्पसंख्यक समूहों पर क्या असर पड़ेगा। औद्योगिक क्षेत्र सुगठित है, उनकी आवाज शक्तिशाली है, उसमें एकता है और इसलिए इसका प्रभाव पड़ता है। लेकिन हमारे देश में बहुत-से ऐसे वर्ग हैं जिनकी आवश्यकताएँ अन्य वर्गों से कहीं ज्यादा महत्व की हैं। परंतु उनमें एकता नहीं है, उनकी माँग को प्रस्तुत करने वाला कोई नहीं है और उन्हें शायद पता तक नहीं होता कि उनकी कुछ माँगें भी हैं। लेकिन केवल इसी कारण से उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। हम यह नहीं कह सकते कि उनकी कोई माँगें नहीं हैं।
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Speedy Shorthand
Speedy Shorthand — Typing Test Result
Exam—
Exerciseप्रतिलेखन- 67 & 68 (रामधारी गुप्ता खंड-1)
Date—
Font—
Detailed Result
Test Duration
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Backspace Used
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Words Typed / Total
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Characters
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Correct Words
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Incorrect Words
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Extra Words
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Skipped Words
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Total Raw Errors (Wrong + Skipped + Extra)
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⚠️ Effective Errors (accuracy & marks basis)
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📐 Accuracy Formula
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Space Mistakes
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Punctuation Mistakes
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Half Mistakes
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Full Mistakes
0
Cap Mistakes
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General Method (Speed Calculation)
Method 1 — Words separated by space
Net Speed: —
Gross Speed: —
CPM: —
Accuracy: —
Method 2 — 5 characters per word
Net Speed: —
Gross Speed: —
CPM: —
Accuracy: —
📊 View Result As:
Manual Preference — Performance Summary
| Your Requirements | Your Performance |
|---|---|
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Min Speed Required:—
Accuracy Required:—
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Net Speed Achieved:—
Accuracy Achieved:—
Total Errors:0
Error %:—
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Exam Based Result
| Exam Requirements | Your Performance |
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Min Speed:—
Min Words:—
Errors Permitted:—
Min Accuracy:—
Max Marks:—
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Final Correct Words:—
Net Speed:—
Error % Made:—
Exam Accuracy:—
Marks Obtained:—
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📊 Score Calculation Breakdown
Gross Correct Words: —
Permissible Errors: —
Excess Errors: —
Words Deducted: —
Final Correct Words: —
Net Speed (final): —
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Typing Comparison
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✗ Wrong
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→ Correction
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✗
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½
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Punctuation Mistakes
0
␣
Space Mistakes
0
Aa
Capitalisation Mistakes
0
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+ Spelling × weight + Punctuation × weight + Space × weight
(weight: Full=1, Half=0.5, None=0 — as per exam/manual setting)
(weight: Full=1, Half=0.5, None=0 — as per exam/manual setting)