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Speedy Shorthand
Shorthand Dictation Test
🇮🇳 Hindi
निबंध- वन्य जीव संरक्षण
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Original Speed
85 WPM
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Words
800
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Typing Time
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📄 Transcript
मनुष्य के लिए वन प्रकृति का ऐसा वरदान है, जिस पर उसका अस्तित्व, उन्नति एवं समृद्धि निर्भर है। वनों में जिन्दगी बसर करने वाले वन्य जीवों से मानव जाति का युगों से घनिष्ठ सम्बन्ध रहा है। अपने विकास की प्रारम्भिक अवस्था में मानव जाति एक वन्य जीव ही थी। विकास के दौरान उसकी बुद्धि विकसित होने के परिणामस्वरूप मनुष्य धीरे-धीरे वन्य जीवों से अलग होकर सभ्य समाज का नया और अपना उद्गम खोजने की क्षमता विकसित कर प्रकृति का स्वामी बन गया। प्राकृतिक रूप और उसमें निवास करने वाले वन्य प्राणी आज भी मनुष्य की सहायता के बिना जीवित रह सकते हैं, जबकि मानव समाज इनके अभाव में अपना अस्तित्व बनाए नहीं रख सकता। ग्रामीण के अतिरिक्त औद्योगिक आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक उन्नति के साथ जिस तरह भारतीय कृषि में परिवर्तन हुए हैं, जितना प्रकृति, पानी, वायु, पेड़-पौधे, वनस्पति, जीवों की पूजा-आराधना एवं संरक्षण की ओर ध्यान दिया गया है, उतना शायद किसी अन्य देश में नहीं हो पाया है। प्राकृतिक संसाधनों एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के प्रति जितनी सोच-समझ प्राचीन भारतीय समाज की रही है, उसका शतांश भी पर्याप्त नहीं है। लेकिन यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि आज प्रकृति और वन्य जीवन संरक्षण की बात विदेशी लोग हम बता रहे हैं, जबकि प्रकृति संरक्षण तो हमारी भारतीय जीवन पद्धति का अंग रहा है। वन्य जीव से हम उन पशु-पक्षी, जानवर और अन्य जीवों को कहते हैं, जिन्हें मानव द्वारा पालतू न बनाया गया हो। वन्य जीव दुनिया के सभी पारिस्थितिकी में पाए जाते हैं, जिनमें रेगिस्तान, वन, घासभूमि, मैदान, पर्वत और शहरी क्षेत्र शामिल हैं। ये जीव जंगलों की खाद्य श्रृंखला में मानव सहित अन्य जीवों से जुड़े होते हैं। इनके विपरीत घरेलू जीव-जंतु जैसे— नीलगाय, कुत्ता, गाय, बैल, बकरी आदि नहीं हैं। भारत में ही सिंह, हाथी, गैंडा, सियार, लोमड़ी, जिराफ, खरगोश, हिरण, बारहसिंगा, चीतल इत्यादि कुछ प्रमुख वन्य जीव हैं। विकास के दबाव में प्राकृतिक संसाधनों के विवेकहीन दोहन-शोषण ने आज हमें पर्यावरणीय संकट के ऐसे कगार पर खड़ा किया है, जहाँ वन्य प्राणियों का अस्तित्व संकट में है। इस स्थिति में हमारी अगली पीढ़ी को वन्य प्राणियों का क्या स्वरूप मिलेगा? शुद्ध पर्यावरण का अभाव, दूषित जल, खतरनाक रसायनों से मृदा की मौलिकता का ह्रास, सिमटते प्राकृतिक वन, वायुमण्डल में वैश्विक प्रदूषण से बढ़ता तापक्रम, खाद्यशृंखला में जैविक-जीवित पदार्थों का ह्रास और जैव विविधता में मौलिक ह्रास— ये सभी आज हमारी चिन्ता का विषय हैं। यदि इन पर आज ध्यान नहीं दिया गया, तो वन्य प्राणियों के संरक्षण पर संकट आ सकता है। संसार में वन्य जीवों का विनाश शिकार और उनकी उपेक्षा के कारण हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप वन्य पशु-पक्षियों की संख्या बहुत कम हो गई है। जैविक संतुलन तोड़ने के अतिरिक्त मनुष्य द्वारा औद्योगिक विकास ने भी वन्य पशु-पक्षियों को नुकसान पहुँचाया है। इसलिए अनेक देशों की भाँति भारत में भी राष्ट्रीय उद्यान तथा अभयारण्यों की स्थापना की गई है। वन्यजीव संरक्षण केवल पशु-पक्षियों को बचाने का प्रयास भर नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की निरंतरता और पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने की अनिवार्य शर्त है। प्रकृति में प्रत्येक जीव का अपना विशिष्ट स्थान और भूमिका होती है। छोटे-से छोटे कीट से लेकर विशालकाय हाथी तक, सभी जीव पारिस्थितिकी तंत्र की श्रृंखला में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। यदि इस श्रृंखला की कोई एक कड़ी कमजोर पड़ती है या टूट जाती है, तो उसका प्रभाव पूरे तंत्र पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में शिकारी जीवों की संख्या घट जाती है, तो शाकाहारी जीवों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ सकती है, जिससे वनस्पति को भारी नुकसान पहुँचता है और अंततः मानव जीवन भी प्रभावित होता है। भारत जैसे विशाल और जैव विविधता से भरपूर देश में वन्यजीव संरक्षण का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहाँ विभिन्न प्रकार की जलवायु, भौगोलिक परिस्थितियाँ और वन क्षेत्र पाए जाते हैं, जिनमें असंख्य वन्य प्रजातियाँ निवास करती हैं। हिमालयी क्षेत्र से लेकर पश्चिमी घाट, सुंदरवन के मैंग्रोव वन से लेकर थार के मरुस्थल तक, हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट वन्य संपदा है। इन जीवों का संरक्षण केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी आवश्यक है, क्योंकि भारतीय सभ्यता में वन्य जीवों को देवी-देवताओं, कथाओं और परंपराओं से जोड़ा गया है। आज के समय में बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, सड़क और बांध निर्माण, खनन तथा औद्योगिक विस्तार ने वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को सीमित कर दिया है। जब जंगल कटते हैं, तो केवल पेड़ ही नहीं गिरते, बल्कि वहाँ रहने वाले जीवों का घर भी नष्ट हो जाता है। परिणामस्वरूप वे भोजन और सुरक्षा की तलाश में मानव बस्तियों की ओर बढ़ते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं। ऐसे संघर्षों में कभी-कभी वन्य जीवों को अपनी जान गंवानी पड़ती है, तो कभी मनुष्य को नुकसान उठाना पड़ता है। वन्यजीव संरक्षण के लिए केवल सरकारी प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी अतयंत आवश्यक है।
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Speedy Shorthand
Speedy Shorthand — Typing Test Result
Exam—
Exerciseनिबंध- वन्य जीव संरक्षण
Date—
Font—
Detailed Result
Test Duration
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Total Raw Errors (Wrong + Skipped + Extra)
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⚠️ Effective Errors (accuracy & marks basis)
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📐 Accuracy Formula
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Space Mistakes
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Punctuation Mistakes
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Half Mistakes
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Full Mistakes
0
Cap Mistakes
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General Method (Speed Calculation)
Method 1 — Words separated by space
Net Speed: —
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CPM: —
Accuracy: —
Method 2 — 5 characters per word
Net Speed: —
Gross Speed: —
CPM: —
Accuracy: —
📊 View Result As:
Manual Preference — Performance Summary
| Your Requirements | Your Performance |
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Exam Based Result
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Extra / Skipped (full)
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½
Spelling Mistakes
0
।
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0
␣
Space Mistakes
0
Aa
Capitalisation Mistakes
0
Effective Errors = Wrong(full) + Extra(full) + Skipped(full)
+ Spelling × weight + Punctuation × weight + Space × weight
(weight: Full=1, Half=0.5, None=0 — as per exam/manual setting)
(weight: Full=1, Half=0.5, None=0 — as per exam/manual setting)
